इतिहास

1974 :चौ. चरण सिंह के नेतृत्व वाली भारतीय क्रांति दल (बी.के.डी.) में 7 अन्य दलों जिनमें प्रमुख थे स्वतंत्र पार्टी, उत्कल कांग्रेस व सोशलिस्ट पार्टी के विलय स्वरुप भारतीय लोकदल (बी.एल. डी.) की स्थापना हुई।

1977: में तत्कालीन इंदिरा सरकार के विरोध में भारतीय लोकदल (बी.एल. डी.) के साथ कॉंग्रेस (ओ), जनसंघ व अन्य पार्टियों के गठबंधन उपरांत जनता पार्टी का उदय हुआ।

1977 :चरण सिंह जी ने आम चुनावों में कांग्रेस की हार का प्रमुख चुनावी आधार प्रदान कर दिया और मोरार जी देसाई और चौधरी चरण सिंह के नेतृत्व में आम चुनाव में कॉंग्रेस की हार हुई। इस चुनाव में कॉंग्रेस के 189 सीटों के मुक़ाबले जनता पार्टी गठबंधन ने 345 सीटों पर जीत दर्ज़ की। इस आम चुनाव में जनता पार्टी की अगुवाई करने वाले श्री मोरार जी देसाई प्रधानमंत्री व चौ. चरण सिंह केंद्रीय गृहमंत्री बनें।

1978 : जनता पार्टी के घटक दलों में आपसी मतभेद। भारतीय लोकदल को निष्क्रिय करने की साजिश हुई तथा चौधरी चरण सिंह जी को मंत्रिमंडल से निकाल दिया गया। इसके बाद 23 दिसंबर को दिल्ली में ऐतिहासिक किसान रैली की अध्यक्षता कर चौ. चरण सिंह ने अपने जनाधार को साबित कर दिया। समस्त गठबंधन को इस जनाधार के आगे झुकना पड़ा और 24 जनवरी, 1979 को मोरारजी देसाई द्वारा मंत्रिमंडल में चरण सिंह जी की उपप्रधानमंत्री एवं वित्त मंत्री के रूप में वापसी हुई। परन्तु 16 जुलाई को मोरारजी देसाई मंत्रिमंडल से चौ. साहब ने इस्तीफ़ा दे दिया। जिसके बाद तत्कालीन राष्ट्रपति श्री नीलम संजीव रेड्डी द्वारा चौधरी जी को प्रधानमंत्री बनने हेतु आमंत्रण मिला।

1979 : चौधरी चरण सिंह जी कॉंग्रेस (आई) तथा समाजवादियों के समर्थन से प्रधानमंत्री बने, परन्तु कॉंग्रेस द्वारा समर्थन वापसी के उपरांत इन्होनें 20 अगस्त को त्यागपत्र दे दिया।14 जनवरी,1980 तक कामचलाऊ प्रधानमंत्री के तौर पर, लोकसभा के मध्यावधि चुनाव आयोजित होने तक, वह पद पर बने रहे।

1980 : 1974 में चौ. चरण सिंह द्वारा स्थापित जनता पार्टी का नाम 1980 के आम चुनाव से पूर्व स्वयं चौधरी जी ने "लोकदल"कर दिया। 1980 के लोकसभा चुनाव में चौ. चरण सिंह की अध्यक्षता में लोकदल ने 41 सीटें जीती थी। इसके पश्चात 1982 में अटल बिहारी वाजपेयी जी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी से प्रथम राष्ट्रीय लोकतान्त्रिक गठबंधन स्थापित हुआ परन्तु विचारधाराओं में विरोध के चलते यह विफल हो गया साथ अन्य घटक दलों ने पार्टी को कमजोर करने के लिए षड़यंत्र रचे। 1984 आते-आते धीरे-धीरे चौधरी चरण सिंह जी इंदिरा गाँधी के राजनितिक विरोध के केंद्र बन गए। 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी जी का उनके रक्षकों द्वारा हत्या करने से एक सुहानुभूति की लहर देश में दौड़ पड़ी जिसका सीधा असर 1984 के आम चुनाव में पड़ा, कांग्रेस के आलावा सभी पार्टियाँ धराशायी हो गयी और राजीव गाँधी को प्रचंड बहुमत मिल गया।

1985 : लोकदल ने राजस्थान विधानसभा का चुनाव भाजपा के साथ गठबंधन में लड़ा और लोकदल को 27 और भाजपा को 39 सीटें मिली थी

वर्तमान : लोकदल की कमान 2005 से चौधरी चरण सिंह जी के करीबी एवं कई बार के लोकदल विधायकएवं मंत्री रहे चौधरी राजेंद्र सिंह जी के बेटे चौधरी सुनील सिंह जी के हाथों में है।