विचारधारा

लोकदल की विचारधारा पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह जी के 'किसानवाद' के दर्शन से प्रेरित है जिसमें किसानहित को सर्वोपरि मान उनके हितों के रक्षण व प्रोत्साहन को समर्थन प्रदान किया। माननीय चौधरी जी की विचारधारा उनके सिर्फ एक वाक्य में निहित है:-

"देश की खुशहाली का रास्ता गाँव के खेत और खलियानों से होकर गुजरता है"।

किसानवाद को सारगर्भित करते चौधरी चरण सिंह के दर्शन के अनुसार लोकदल का मिशन गांव, गरीब, मजदूर के विकास के लिए संकल्पित है। हमारा देश भारत एक कृषि प्रधान देश है। देश की अधिकतम आबादी का जीवन यापन कृषि व उस पर आधारित उत्पादों पर निर्भर करती है। भारत के परतंत्र रहते जो हालात किसानों के थे उसमें आज़ादी के बाद भी कुछ विशेष परिवर्तन नहीं हुआ। आज भी निरंतर किसान गरीब होता ही जा रहा है। उनके जीवनस्तर में रंचमात्र भी सुधार नहीं हो रहा। कर्ज़ की मार झेलते हुए किसी पेड़ की शाखा पर लटकी हुई रस्सी ही उसके सम्मुख आखिरी विकल्प बचता है। लोकदल की स्थापना से ही किसानों के मसीहा माननीय चौ. चरण सिंह की विचारधारा अत्यंत स्पष्ट थी जोकि किसानों व निर्धनों पर केंद्रित थी और आज भी पार्टी की मुख्य विचारधारा है। यद्यपि समय समय पर देश की अन्य समस्याओं को समझते हुए उनके समाधान संबंधित विचारों को भी पार्टी ने आत्मसात किया। जेपी आंदोलन के दौर में भ्रष्टाचार, तानाशाही का पुरजोर विरोध करते हुए लोकतंत्र की गरिमा को अक्षुण रखने हेतु चौधरी जी ने प्रजातांत्रिक प्रणाली को मजबूत बनाया व उनके इस महान सोच को पार्टी ने आत्मसात किया। गरीबों, मजलूमों, सामाजिक व आर्थिक रूप से कमजोरों के उत्थान करने तथा सामाजिक साम्यता को सुदृढ़ करने हेतु समाजवाद के विचारों को भी ग्रहण किया गया।